Cup of Words : poetry blog
चाँद पर कविता

Hindi Poetry on Love चाँद की बेरुखी

चाँद से झगड़ा हो गया  वो जा बादलों में छुप गया  पर मैं फिर भी निहारती रही  उसे देखने को सुबह तक जागती रही  मैं तन्हा.. मेरी नम आ…

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